October 16, 2026 4:09 am

ब्लू ड्रम में पति की लाश, बेडरूम में पत्नी की अय्याशी… मेरठ के खौफनाक हत्याकांड की पूरी कहानी

Meerut Blue Drum Murder Case

Meerut Blue Drum Murder Case: एक नीला ड्रम. उसके भीतर सीमेंट और रेत के बीच छिपी एक लाश. बाहर की दुनिया के लिए सब कुछ सामान्य दिखाने की कोशिश और उस घर के भीतर दफन एक ऐसा राज, जिसने पूरे देश को सन्न कर दिया. मेरठ के सौरभ राजपूत हत्याकांड की कहानी किसी डरावनी क्राइम थ्रिलर से कम नहीं थी.

इस कहानी में किरदार काल्पनिक नहीं थे.  जिस शख्स के साथ जिंदगी बिताने की कसमें खाई गई थीं, उसी की जिंदगी खत्म करने का आरोप उसकी पत्नी मुस्कान रस्तोगी पर लगा. पुलिस के मुताबिक, इस वारदात में मुस्कान का प्रेमी साहिल शुक्ला भी शामिल था.

14 अक्टूबर 2026 को इस चर्चित हत्याकांड में अदालत ने मुस्कान और साहिल को मौत की सजा सुनाई. इससे पहले 30 सितंबर को दोनों को दोषी ठहराया गया था. अभियोजन पक्ष ने इसे सोची-समझी और बेहद क्रूर हत्या बताते हुए अधिकतम सजा की मांग की थी. सौरभ के परिवार ने भी दोषियों को फांसी देने की मांग की.

करीब 13 महीने तक चली सुनवाई, 126 अदालती कार्यवाहियों और 22 से अधिक गवाहों की गवाही के बाद आया यह फैसला उस मामले का अहम पड़ाव है, जिसकी सबसे भयावह पहचान बन गया था एक नीला ड्रम.

लंदन से लौटा था सौरभ, मनाया पत्नी का जन्मदिन

कहानी की शुरुआत फरवरी 2025 से होती है. मर्चेंट नेवी में काम कर चुका सौरभ राजपूत लंदन से मेरठ लौटा था. परिवार के साथ वक्त बिताने की उम्मीद लेकर आया सौरभ शायद इस बात से अनजान था कि उसके अपने घर में रिश्तों की एक ऐसी उलझन मौजूद है, जो उसकी जिंदगी छीन लेगी.

24 फरवरी को उसकी वापसी हुई और अगले दिन पत्नी मुस्कान का जन्मदिन मनाया गया. घर में जन्मदिन की खुशियां थीं, लेकिन कुछ ही दिनों बाद उसी घर से एक ऐसा मामला सामने आने वाला था, जिसकी चर्चा देशभर में होने लगी.

अभियोजन पक्ष के मुताबिक, मुस्कान का साहिल शुक्ला के साथ प्रेम संबंध था. सौरभ की मौजूदगी इस रिश्ते के बीच बाधा बन रही थी. पुलिस की जांच और अदालत में पेश किए गए साक्ष्यों के मुताबिक, इसी रिश्ते के चलते दोनों ने सौरभ को रास्ते से हटाने की साजिश रची. यह महज एक प्रेम त्रिकोण की कहानी नहीं रह गई थी. आरोपों के मुताबिक, एक पति, एक पत्नी और पत्नी के प्रेमी के बीच उलझे रिश्तों का अंत हत्या की खौफनाक वारदात में हुआ.

Meerut Blue Drum Murder

पहले बेहोश किया, फिर चाकू से वार

3 मार्च 2025 की रात मेरठ के इंद्रानगर स्थित घर में सौरभ की जिंदगी का आखिरी अध्याय लिखा गया. अभियोजन पक्ष के अनुसार, मुस्कान ने सौरभ को नशीला पदार्थ देकर बेहोश किया. इसके बाद साहिल भी वहां पहुंचा. आरोप है कि दोनों ने मिलकर सौरभ पर चाकू से हमला किया और उसकी हत्या कर दी. इसके बाद शव के टुकड़े किए गए, ताकि पहचान छिपाई जा सके और वारदात का खुलासा होने से रोका जा सके.

लेकिन हत्या के बाद जो किया गया, उसने इस मामले को देश के सबसे चर्चित आपराधिक मामलों में शामिल कर दिया. शव के टुकड़ों को एक बड़े नीले प्लास्टिक ड्रम में रखा गया. फिर उसमें सीमेंट, रेत और पानी का मिश्रण भरकर शव को छिपाने की कोशिश की गई. जिस ड्रम का इस्तेमाल आम तौर पर सामान रखने के लिए होता है, वही एक इंसान की हत्या के सबूत छिपाने का जरिया बना दिया गया.

यहां रिश्तों की क्रूरता का सबसे बड़ा सवाल सामने आता है. जिस घर को सौरभ ने अपना परिवार समझा, उसी घर में उसकी हत्या हुई. जिस पत्नी के साथ उसने जीवन बिताया, उसी पर हत्या की साजिश में शामिल होने का आरोप साबित हुआ. और जिस रिश्ते को छिपाने की कोशिश की जा रही थी, उसी के चलते दो लोगों को अदालत ने दोषी ठहराया.

कत्ल के बाद हिमाचल की ओर निकले दोनों

अभियोजन के मुताबिक, हत्या के अगले दिन मुस्कान और साहिल हिमाचल प्रदेश चले गए. इस दौरान सौरभ के फोन का इस्तेमाल कर उसके परिवार को ऐसे संदेश भेजे गए, जिनसे यह लगे कि वह जिंदा है और यात्रा पर है. यह कोशिश थी कि घरवालों को उसकी गैरमौजूदगी पर शक न हो और हत्या का राज कुछ और दिनों तक दबा रहे.

लेकिन किसी इंसान की गैरमौजूदगी को हमेशा कहानी बनाकर नहीं समझाया जा सकता. सौरभ से संपर्क नहीं हो पाने पर परिवार और रिश्तेदारों की चिंता बढ़ने लगी. सवाल उठने लगे कि आखिर सौरभ कहां है और उससे बात क्यों नहीं हो रही. परिजनों की तलाश और पुलिस की कार्रवाई के बीच जांच की दिशा उस घर की ओर बढ़ी, जहां एक नीले ड्रम के भीतर खौफनाक सच बंद था.

Meerut Blue Drum Murder

एक बच्ची की बात ने भी खींचा ध्यान

इस मामले से जुड़ी रिपोर्टों में सौरभ और मुस्कान की छह साल की बेटी का जिक्र भी आया. बताया गया कि बच्ची ने पड़ोसियों से कहा था कि पापा ड्रम में हैं. इस कथन ने लोगों को झकझोर दिया. हालांकि, किसी भी आपराधिक मामले में ऐसे बयान की अहमियत का निर्धारण जांच और अदालत में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही किया जाता है.

एक बच्ची के लिए पिता का गायब होना और फिर परिवार से जुड़ा ऐसा सच सामने आना कितना बड़ा सदमा हो सकता है, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है. इस हत्याकांड में सिर्फ एक व्यक्ति की जान नहीं गई. एक परिवार का भरोसा टूटा, एक बच्ची का संसार उजड़ा और रिश्तों की उस बुनियाद पर सवाल खड़े हुए, जिसे सुरक्षा और विश्वास का प्रतीक माना जाता है.

17 मार्च को खुला नीले ड्रम का राज

मार्च 2025 के मध्य तक मामला पुलिस की जांच के दायरे में आ चुका था. 17 मार्च को इंद्रानगर स्थित घर से नीला ड्रम खोला गया और उसके भीतर सौरभ के अवशेष मिले. ड्रम में सीमेंट से शव छिपाए जाने की बात सामने आते ही पूरा मामला सनसनीखेज हत्याकांड में बदल गया. जिस राज को छिपाने के लिए ड्रम को सील किया गया था, वही ड्रम जांच का सबसे अहम सुराग बन गया.

18 मार्च को पुलिस ने मुस्कान और साहिल को गिरफ्तार कर लिया. अगले दिन दोनों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया. 12 मई 2025 को पुलिस ने करीब एक हजार पन्नों की चार्जशीट दाखिल की. इसमें गवाहों के बयान और जांच से जुड़े साक्ष्य शामिल किए गए.

दुकानदारों से लेकर डिजिटल रिकॉर्ड तक

इस मामले की जांच में पुलिस ने सिर्फ आरोपियों के बयानों पर निर्भर रहने के बजाय भौतिक और तकनीकी साक्ष्यों की कड़ियां जोड़ीं. अभियोजन पक्ष के मुताबिक, दुकानदारों के बयान अहम रहे. उन दुकानदारों ने ड्रम, सीमेंट, रेत और वारदात में इस्तेमाल किए जाने वाले औजारों की खरीद से जुड़ी जानकारी दी.

कॉल डिटेल रिकॉर्ड और लोकेशन से जुड़े साक्ष्यों को भी अदालत के सामने रखा गया. जांच में सौरभ की घर पर मौजूदगी और आरोपियों की गतिविधियों से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड की पड़ताल की गई. हिमाचल प्रदेश में शिमला और मनाली की यात्रा से संबंधित जानकारियां भी जांच का हिस्सा बनीं. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सौरभ की मौत चाकू से किए गए हमले के कारण होने की पुष्टि हुई.

अदालत में अभियोजन पक्ष ने इन साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर अपना मामला रखा. करीब 13 महीने चली सुनवाई में 126 अदालती कार्यवाहियां हुईं और अभियोजन के 22 से अधिक गवाहों के बयान दर्ज किए गए. इस तरह पुलिस की जांच से लेकर अदालत की सुनवाई तक, नीले ड्रम के पीछे छिपे अपराध की कड़ियां जोड़ी गईं.

30 सितंबर को दोषी करार, 14 अक्टूबर को फांसी

मेरठ की जिला एवं सत्र अदालत में इस मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अपराध की गंभीरता और उसकी सुनियोजित प्रकृति का हवाला देते हुए मृत्युदंड की मांग की. सौरभ के परिवार ने भी दोषियों के लिए अधिकतम सजा की मांग की. दूसरी ओर, सजा पर बहस के दौरान बचाव पक्ष ने अपने तर्क रखे.

30 सितंबर 2026 को जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार मिश्रा की अदालत ने मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को हत्या तथा सबूत मिटाने के अपराध में दोषी ठहराया. सजा पर अंतिम फैसला 14 अक्टूबर के लिए सुरक्षित रखा गया था.

14 अक्टूबर को अदालत ने दोनों को मौत की सजा सुनाई. अदालत ने हत्या के लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 302 और सबूत मिटाने से संबंधित धारा 238(A) के तहत भी जुर्माना लगाया. मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, न्यायाधीश ने महाभारत का उल्लेख करते हुए कहा कि अपराध की गंभीरता के अनुरूप दोषियों को दंडित करना भी धर्म है. अभियोजन पक्ष ने इस फैसले को मामले की गंभीरता के अनुरूप बताया.

क्या यहीं खत्म हो गई ब्लू ड्रम मर्डर केस की कहानी?

अदालत से मौत की सजा मिलने का मतलब यह नहीं है कि कानूनी प्रक्रिया पूरी हो गई है. भारतीय कानून के तहत सत्र अदालत द्वारा सुनाई गई मृत्युदंड की सजा पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की पुष्टि जरूरी होगी. दोषियों के पास कानून के तहत आगे अपील करने और निर्धारित परिस्थितियों में समीक्षा याचिका तथा दया याचिका दाखिल करने के विकल्प भी उपलब्ध हैं.

इसलिए 14 अक्टूबर का फैसला इस मामले में एक बड़ा पड़ाव जरूर है, लेकिन सजा के अंतिम क्रियान्वयन से पहले न्यायिक प्रक्रिया के बाकी चरण पूरे होने हैं.

एक नीला ड्रम, कई सवाल और बिखर गया एक परिवार

मेरठ के इस हत्याकांड में सबसे ज्यादा विचलित करने वाली बात सिर्फ हत्या का तरीका नहीं, बल्कि रिश्तों का वह टूटना है जो इस वारदात के केंद्र में था. एक पति की हत्या हुई. एक पत्नी और उसके प्रेमी को अदालत ने दोषी ठहराया. एक बच्ची से उसके पिता का साया छिन गया और परिवार को अपने ही घर से जुड़ा ऐसा सच झेलना पड़ा, जिसकी कल्पना भी मुश्किल है.

सौरभ की हत्या के बाद नीले ड्रम में छिपाए गए अवशेष बरामद हुए, जांच हुई, गवाह सामने आए और अदालत ने अपना फैसला सुनाया. मगर इस पूरी कहानी का सबसे बड़ा सबक यही है कि किसी रिश्ते का अंत चाहे जितना कड़वा क्यों न हो, उसका जवाब हिंसा और हत्या नहीं हो सकता. भरोसे की जगह जब छल ले ले और रिश्तों की जगह अपराध, तब उसका अंजाम सिर्फ दो लोगों की जिंदगी तक सीमित नहीं रहता. उसकी कीमत पूरा परिवार चुकाता है.

मेरठ ब्लू ड्रम मर्डर केस में अदालत का फैसला आ चुका है. लेकिन इस कहानी में एक नीला ड्रम हमेशा उस खौफनाक सच की याद दिलाता रहेगा, जिसमें एक घर के भीतर छिपे अपराध ने पूरे देश को झकझोर दिया.

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