कुछ कहानियां ऐसी होती हैं जो सिर्फ एंटरटेनमेंट करने का काम करती हैं। वहीं, कुछ कहानियां ऐसी होती हैं जो किसी भी इंसान को अंदर तक झकझोर कर रख देती हैं। महेश भट्ट के नए टॉक शो पहचान की कहानी दूसरी सेकेंड कैटेगिरी में शामिल होती नजर आती है। जहाँ ऐसे असल जीवन के शुरवीर से महेश भट्ट हम सबको मिलवाने की कोशिश करेंगे, जिनकी बाते हमे अंदर तक हिल कर रख देगी। बॉलीवुड के जानेमाने निर्देशक और निर्माता महेश भट्ट एक एंकर के तौर पर इसके जरिए उभरकर सामने आ रहे है। यहीं चीज उनकी सबसे बड़ी ताकत बनकर लोगों के सामने उभर रही है। क्योंकि महेश भट्ट इन्हें एक फिल्मकार की तरह नहीं, बल्कि एक ऐसे इंसान की तरह देखते हैं जो सच की तलाश में है।
बैसाखी पर दस्तक देगा पहचान
वहीं, पहचान सभी का ध्यान एक ऐसे समुदाय की ओर खींचता हुआ नजर आ रहा है, जिसने सदियों से अपने मूल्यों को जिया है जोकि सिख समुदाय से जुड़े हैं। एक ऐसा समुदाय जहाँ साहस एक जीवन का तरीका है।जहाँ आस्था कही नहीं जाती, बल्कि जी जाती है। इसके अलावा जहां सेवा दान नहीं, बल्कि ईश्वर की भक्ति है।
इस बैसाखी पर SonyLIV और SonyLIV के YouTube चैनल पर पहचान को लोगों के बीच उतारा गया है। इंटरनेशनल लेवल पर छाप छोड़ने के मकसद से मेकर्स ने शुरुआत से ही एक साफ और दूर की प्लानिंग कर ली है। इसी सोच के साथ पहचान को न केवल SonyLIV के OTT प्लेटफॉर्म पर, बल्कि उनके YouTube चैनल पर भी रिलीज़ किया जा रहा है, ताकि इस शो का मैसेज दुनिया के हर कोने तक पहुँचे सके। जब दुनिया शोर, पहचान और खुद को अलग करने की उलझने में फंसी हुई है।
पहचान की 13 कहानियों जो छू लेगीं आपके दिल
विनय भारद्वाज ने इस शो को बनाया है, जिसमें 13 ऐसे सिख लोगों की कहानियां दिखाई गई हैं, जिन्होंने मुश्किलों का सामना किया, दूसरों के लिए त्याग किया और हमेशा इंसानियत की मदद करने का काम किया।
इस शो के बारे में बात करते हुए महेश भट्ट ने कहा, “मैंने अपनी पूरी जिंदगी इंसानी जज़्बातों, संघर्षों और तलाश की कहानियाँ कही हैं। लेकिन जब मैं इन आवाज़ों के साथ बैठा, तो मैंने एक गहरी सच्चाई महसूस की जो लोग बिना पहचान चाहे सेवा करते हैं, उनमें एक अद्भुत शक्ति होती है। सिखों की सेवा कोई विचार नहीं, एक जीवंत सत्य है। पहचान ने मुझे सुनने, सीखने और खुद से फिर जुड़ने का मौका दिया।”
इसके अलावा विनय भारद्वाज ने इसको लेकर कहा, “हम एक और शो नहीं बनाना चाहते थे। हम एक ऐसा अनुभव बनाना चाहते थे जिसे महसूस किया जा सके। सिख धर्म को समझाने की नहीं, महसूस कराने की जरूरत है।”








