September 10, 2026 3:31 pm

Drishyam Trailer Review: इस बार राज नहीं, पूरा सच सामने आएगा?

Drishyam Trailer Review: कुछ कहानियां खत्म होने के बाद भी दर्शकों का पीछा नहीं छोड़तीं. ‘दृश्यम’ ऐसी ही कहानी है. विजय सालगांवकर ने पुलिस की आंखों के सामने झूठ की ऐसी दीवार खड़ी की थी, जिसके पीछे छिपे सच तक पहुंचना आसान नहीं था. अब ‘दृश्यम: द कन्क्लूजन’ के साथ वही कहानी अपने आखिरी और सबसे पेचीदा मोड़ पर पहुंचती दिख रही है. ट्रेलर यह सवाल छोड़ता है कि जिस राज़ को विजय ने इतने सालों से बचाकर रखा, क्या इस बार वही राज़ उसके लिए सबसे बड़ा खतरा बनने वाला है?

ट्रेलर की शुरुआत से ही माहौल में एक बेचैनी महसूस होती है. पिछली फिल्मों में विजय की सबसे बड़ी ताकत उसका शांत दिमाग था. वह हर कदम सोच-समझकर उठाता था और पुलिस को कहानी के पीछे दौड़ाता था. लेकिन इस बार तस्वीर कुछ बदली हुई नजर आती है. विजय अभी भी शांत है, लेकिन उसके चेहरे पर पहले वाली बेफिक्री नहीं दिखती. ऐसा लगता है जैसे खेल अब उसके बनाए नियमों के मुताबिक नहीं चल रहा.

और फिर सामने आते हैं जयदीप अहलावत. ‘दृश्यम: द कन्क्लूजन’ के ट्रेलर में अजय देवगन और जयदीप अहलावत का आमना-सामना सबसे ज्यादा ध्यान खींचता है. खास बात यह है कि दोनों के बीच बहुत ज्यादा संवाद नहीं हैं, लेकिन आंखों का तनाव काफी कुछ कह देता है. अजय देवगन का संयमित अंदाज विजय सालगांवकर की पुरानी पहचान को बरकरार रखता है, वहीं जयदीप की एंट्री इस बार कहानी में एक अलग तरह का खतरा पैदा करती है. ऐसा खतरा, जिसके सामने विजय की पुरानी चालाकियां कितनी कारगर होंगी, यही सबसे बड़ा सवाल बन जाता है.

ट्रेलर में तब्बू की वापसी भी कहानी को पुराने तनाव से जोड़ती है. मीरा देशमुख और विजय सालगांवकर के बीच की पुरानी जंग को दर्शक पहले ही देख चुके हैं, लेकिन इस बार समीकरण पहले जैसे नहीं लगते. विजय के परिवार के पुराने किरदार भी कहानी का हिस्सा बने हुए हैं. श्रिया सरन, इशिता दत्ता, रजत कपूर, कमलेश सावंत और मृणाल जाधव की मौजूदगी यह साफ करती है कि कहानी सिर्फ एक नए पुलिस अफसर और विजय की भिड़ंत तक सीमित नहीं रहने वाली.

वहीं प्रकाश राज और जयदीप अहलावत जैसे नए चेहरे इस फ्रेंचाइज़ी की दुनिया को बड़ा करते दिखाई देते हैं. खासकर जयदीप का किरदार ट्रेलर में पूरी तरह खुलकर सामने नहीं आता और यही इसकी दिलचस्पी बढ़ाता है. वह विजय के खिलाफ है, लेकिन उसके पास कितना सच है और वह विजय की कहानी के कितने पन्ने खोल सकता है, इसका जवाब ट्रेलर जानबूझकर नहीं देता.

यही ‘दृश्यम: द कन्क्लूजन’ के ट्रेलर की सबसे बड़ी खूबी है. यह आपको कहानी समझाने के बजाय सवालों के बीच छोड़ देता है. क्या विजय ने सच में हर सबूत मिटा दिया था? क्या परिवार अब भी उसके साथ उसी मजबूती से खड़ा है? क्या पुलिस के पास इस बार ऐसा कोई सुराग है, जो सालों पुरानी पहेली को सुलझा सकता है? और सबसे बड़ा सवाल… क्या विजय इस बार भी सबको मात दे पाएगा?

निर्देशक अभिषेक पाठक के सामने चुनौती आसान नहीं है. ‘दृश्यम’ नाम अपने आप में दर्शकों की उम्मीदों का बोझ लेकर आता है. ऐसे में सिर्फ पुराने फॉर्मूले को दोहराना इस फ्रेंचाइज़ी के लिए काफी नहीं होगा. ट्रेलर से संकेत मिलता है कि मेकर्स कहानी को पुराने किरदारों और पुराने रहस्य से जोड़ते हुए एक नया टकराव खड़ा करने की कोशिश कर रहे हैं. यानी स्वाद ‘दृश्यम’ वाला है, लेकिन खेल इस बार कुछ अलग हो सकता है.

सबसे दिलचस्प बात यह है कि ट्रेलर विजय सालगांवकर को फिर से उसी सवाल के सामने खड़ा करता है, जिससे यह पूरी फ्रेंचाइज़ी पैदा हुई थी. सच क्या है और कहानी क्या है? फर्क सिर्फ इतना है कि इस बार कहानी सुनाने वाला विजय नहीं, बल्कि उसके सामने खड़ा कोई ऐसा शख्स हो सकता है जो उसकी कहानी के अंदर तक पहुंच चुका है.

2 अक्टूबर 2026 को रिलीज होने जा रही ‘दृश्यम: द कन्क्लूजन’ का ट्रेलर कम से कम इतना भरोसा जरूर जगाता है कि यह सिर्फ पुरानी कहानी को आगे बढ़ाने वाला सीक्वल नहीं है. अजय देवगन का विजय अवतार अब भी उतना ही रहस्यमय है, तब्बू की वापसी पुरानी दुश्मनी को फिर हवा देती है और जयदीप अहलावत की मौजूदगी कहानी में सबसे बड़ा नया सवाल खड़ा करती है.

अगर फिल्म ट्रेलर में पैदा किए गए इसी तनाव और रहस्य को बरकरार रख पाती है, तो विजय सालगांवकर की कहानी का यह आखिरी अध्याय दर्शकों के लिए वाकई यादगार हो सकता है. क्योंकि इस बार मामला सिर्फ यह जानने का नहीं है कि विजय ने क्या किया था. असली रोमांच यह जानने में है कि क्या विजय अपने सबसे बड़े राज़ को आखिरी बार भी बचा पाएगा?

सस्पेंस और रहस्य मजबूत नजर आता है. अजय देवगन फिर विजय के किरदार में जमे हैं. जयदीप अहलावत सबसे बड़ा नया आकर्षण हैं. तब्बू की वापसी पुराने तनाव को मजबूत करती है. और सबसे अहम, ट्रेलर जवाब कम देता है और सवाल ज्यादा खड़े करता है.

एक लाइन में कहें तो विजय सालगांवकर लौट आया है. लेकिन इस बार पुलिस उसके राज़ के पीछे नहीं, उसका राज़ ही विजय के पीछे पड़ता नजर आ रहा है.

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