Cricket News: वनडे क्रिकेट में पिछले कुछ सालों में बल्लेबाजों और गेंदबाजों के बीच मुकाबले का संतुलन तेजी से बदला है. स्कोरिंग की रफ्तार भले ही बढ़ी हो, लेकिन बल्लेबाजों के औसत में गिरावट आई है. इसी बीच ICC के एक नियम बदलाव ने गेंदबाजों को पुरानी गेंद के साथ एक नया हथियार दे दिया है. लेकिन टीम इंडिया के लिए यही बदलाव अब परेशानी की वजह बनता दिख रहा है.
2 जुलाई 2025 से वनडे में गेंद के इस्तेमाल का नियम बदला गया. 34 ओवर के बाद दो नई गेंदों में से सिर्फ एक गेंद का इस्तेमाल जारी रखने का प्रावधान किया गया. इसका सीधा मतलब है कि पारी के आखिरी हिस्से में गेंद ज्यादा पुरानी हो सकती है. पुरानी गेंद के साथ रिवर्स स्विंग और दूसरी तरह की मूवमेंट मिलने की उम्मीद बढ़ती है. यानी 35 से 50 ओवर के बीच तेज गेंदबाजों के लिए बल्लेबाजों पर दबाव बनाने का मौका बढ़ गया.
आंकड़े बताते हैं कि इस बदलाव के बाद दुनिया की टॉप-10 वनडे टीमों के तेज गेंदबाजों ने इस मौके का फायदा उठाया है. 2 जुलाई 2025 से पहले 35 से 50 ओवर के बीच इन टीमों के पेसर्स का गेंदबाजी औसत 26.3 था. नियम बदलने के बाद यह आंकड़ा सुधरकर 24.8 हो गया. यानी पुरानी गेंद का इस्तेमाल तेज गेंदबाजों के लिए असरदार साबित हुआ है.
भारत की कहानी यहां कुछ अलग है. नियम में बदलाव के बाद जहां बाकी बड़ी टीमों के पेसर्स के आंकड़ों में सुधार दिखा, वहीं भारतीय तेज गेंदबाजों का प्रदर्शन इस फेज में कमजोर पड़ा. 1 जुलाई 2025 तक 35 से 50 ओवर के बीच भारतीय पेसर्स का औसत 23.5 था. नियम बदलने के बाद यह बढ़कर 32.1 हो गया. इकॉनमी रेट भी 6.9 से बढ़कर 7.9 हो गई.
यानी जिस पुरानी गेंद को विरोधी टीमों के तेज गेंदबाज अपने पक्ष में इस्तेमाल कर रहे हैं, वही गेंद भारत के लिए अभी तक वैसा फायदा नहीं ला सकी है. यही वजह है कि 2027 World Cup की तैयारी के दौरान टीम इंडिया के लिए डेथ ओवर्स और पुरानी गेंद से गेंदबाजी एक अहम सवाल बन गई है.
भारत ने नियम बदलने के बाद 15 वनडे खेले हैं और इस दौरान नौ अलग-अलग तेज गेंदबाजों को आजमाया गया. लेकिन गेंदबाजी संयोजन को लेकर अभी तक पूरी तस्वीर साफ नहीं हुई है. इन 15 मुकाबलों में भारतीय पेसर्स ने पुराने गेंद वाले फेज में कुल 27 विकेट हासिल किए हैं.
Jasprit Bumrah जैसे दुनिया के शीर्ष तेज गेंदबाज का नाम इस लिस्ट में सबसे पहले आता है, लेकिन नियम बदलने के बाद उन्होंने इस चरण में दो मुकाबले खेले और कोई विकेट हासिल नहीं किया. Mohammed Siraj ने चार मैचों में तीन विकेट लिए हैं. Harshit Rana और Gurnoor Brar के आंकड़े भी टीम के लिए ज्यादा राहत देने वाले नहीं रहे. दोनों का औसत 40 से ज्यादा रहा और इकॉनमी 8 रन प्रति ओवर से ऊपर गई.
Arshdeep Singh ने इस दौर में अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया है. उन्होंने छह विकेट लिए और उनकी इकॉनमी 7 रन प्रति ओवर से कम रही. वहीं Prasidh Krishna आठ विकेट के साथ भारतीय पेसर्स में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज हैं. हालांकि उनकी इकॉनमी 8.78 रही, जो डेथ ओवर्स में टीम के लिए चिंता का विषय बन सकती है.
यह पूरा मामला सिर्फ गेंदबाजों के आंकड़ों तक सीमित नहीं है. असली सवाल यह है कि 2027 World Cup से पहले भारत अपनी सबसे मजबूत pace combination कब तैयार करता है. क्योंकि वनडे में 35 से 50 ओवर का चरण अक्सर मैच का रुख तय करता है. इस दौरान विकेट मिलना और रन रोकना दोनों बेहद अहम हो जाते हैं.
दिलचस्प बात यह भी है कि वनडे क्रिकेट में बल्लेबाजों की स्थिति पहले जैसी मजबूत नहीं रही. 2015 से 2020 के बीच बल्लेबाजों का औसत 30.76 था, जबकि 2021 के बाद यह घटकर 28.23 हो गया. इसके बावजूद स्कोरिंग रेट 5 रन प्रति ओवर से ऊपर बना हुआ है. यानी बल्लेबाज तेजी से रन बनाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन विकेट भी पहले की तुलना में ज्यादा गिर रहे हैं.
35 से 50 ओवर के बीच भी नियम बदलाव के बाद टीमों की रन बनाने की रफ्तार में बड़ी गिरावट नहीं आई है. 2012 से 2020 के बीच इस फेज में प्रति पारी औसतन 86.14 रन बने थे. 2 जुलाई 2025 के बाद यह आंकड़ा 80.20 रन प्रति पारी है. इससे संकेत मिलता है कि पुरानी गेंद ने इस हिस्से में बल्लेबाजों के लिए चुनौती जरूर बढ़ाई है.
अब टीम इंडिया के पास इसे सुधारने का वक्त है. अगले चार महीनों में भारत को 14 वनडे मुकाबले खेलने हैं. यही मैच तय करेंगे कि कौन से गेंदबाज पुरानी गेंद संभाल सकते हैं, कौन डेथ ओवर्स में भरोसा जगा सकते हैं और किस combination के साथ भारत 2027 World Cup में उतरने की तैयारी करेगा.
भारत के सामने सवाल साफ है. पुरानी गेंद विरोधियों के पेसर्स का हथियार बन रही है, तो क्या टीम इंडिया के तेज गेंदबाज भी इसी गेंद को अपनी ताकत बना पाएंगे? 2027 World Cup से पहले अगले 14 वनडे इस सवाल का जवाब तलाशने का सबसे बड़ा मौका होंगे.









