September 3, 2026 11:29 am

जानिए राम मंदिर ट्रस्ट के पहले CEO बने एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र की दिलचस्प कहानी

सौरभ शर्मा, लखनऊ

Ayodhya Ram Mandir CEO Jitendra Mishra: 5500 से ज्यादा नाम, तीन नामों की लिस्ट और फिर इस पूर्व एयर मार्शल पर लगी मुहर… राम मंदिर ट्रस्ट ने क्यों चुना जितेंद्र मिश्र को?

अयोध्या में राम मंदिर की भव्यता जितनी बड़ी है, उसे संभालने वाली व्यवस्था की चुनौती भी उतनी ही बड़ी है. मंदिर में रोज उमड़ती श्रद्धालुओं की भीड़, दान और चढ़ावे का प्रबंधन, कर्मचारियों से लेकर संपत्तियों तक की निगरानी और कानूनी मामलों की जिम्मेदारी. इन सबके बीच अब श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने एक ऐसा फैसला लिया है, जिसने सबका ध्यान खींचा है.

ट्रस्ट ने भारतीय वायुसेना के सेवानिवृत्त एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र को अपना पहला मुख्य कार्यकारी अधिकारी यानी CEO बनाया है. यह महज एक नियुक्ति नहीं है. इसे राम मंदिर के प्रबंधन को एक अधिक पेशेवर और जवाबदेह ढांचे में ले जाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है.

खास बात ये है कि इस पद के लिए ट्रस्ट के पास 5500 से ज्यादा आवेदन पहुंचे थे. आवेदनों की पड़ताल के बाद तीन सदस्यीय सर्च कमेटी ने तीन नामों का पैनल तैयार किया. अंतिम फैसला हुआ तो बाजी एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र के नाम गई. लेकिन सवाल यही है कि आखिर इस रेस में एक पूर्व एयर मार्शल सबसे आगे कैसे निकल गए?

air marshal jitendra mishra

फाइटर पायलट से राम मंदिर के CEO तक का सफर

जितेंद्र मिश्र का करियर किसी सामान्य प्रशासनिक अधिकारी का करियर नहीं रहा है. उन्होंने 6 दिसंबर 1986 को भारतीय वायुसेना में फाइटर पायलट के तौर पर कमीशन लिया था. करीब चार दशक लंबे सैन्य करियर में उन्होंने 3000 घंटे से ज्यादा उड़ान भरी. वे फाइटर कॉम्बैट लीडर रहे और एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट के तौर पर भी काम किया.

यानी जिन विमानों की क्षमता और सीमाओं को परखने की जिम्मेदारी बेहद चुनिंदा अधिकारियों को मिलती है, जितेंद्र मिश्र उस भूमिका में भी रहे हैं. उनकी पढ़ाई और प्रशिक्षण भी उनके प्रोफाइल को खास बनाते हैं. वे नेशनल डिफेंस अकादमी, पुणे के पूर्व छात्र हैं. इसके अलावा एयर फोर्स टेस्ट पायलट्स स्कूल, बेंगलुरु, अमेरिका के एयर कमांड एंड स्टाफ कॉलेज और ब्रिटेन के रॉयल कॉलेज ऑफ डिफेंस स्टडीज से भी जुड़े रहे हैं.

पश्चिमी सीमा की कमान से अयोध्या की व्यवस्था तक

जितेंद्र मिश्र के सैन्य करियर का सबसे अहम अध्याय भारतीय वायुसेना की वेस्टर्न एयर कमांड की कमान संभालना रहा. उन्होंने 1 जनवरी 2025 से 30 अप्रैल 2026 तक वेस्टर्न एयर कमांड के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ यानी AOC-in-C के रूप में जिम्मेदारी संभाली.

पाकिस्तान से लगी पश्चिमी सीमा के लिहाज से वेस्टर्न एयर कमांड भारतीय वायुसेना की बेहद महत्वपूर्ण कमांड है. यहां लिए जाने वाले फैसलों में रणनीति, संसाधनों का प्रबंधन और बेहद दबाव में निर्णय लेने की क्षमता की बड़ी भूमिका होती है. अब यही अनुभव अयोध्या में एक बिल्कुल अलग तरह की जिम्मेदारी में काम आएगा.

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी सुर्खियों में रहे थे

जितेंद्र मिश्र का नाम मई 2025 के ऑपरेशन सिंदूर के बाद भी चर्चा में रहा. उस वक्त वे वेस्टर्न एयर कमांड के प्रमुख थे. ऑपरेशन के बाद उन्होंने इस अभियान के दौरान अपनी भूमिका और पश्चिमी मोर्चे पर भारतीय वायुसेना की तैयारियों को लेकर विस्तार से बात की थी.

इसी दौरान उन्होंने S-400 एयर डिफेंस सिस्टम से पाकिस्तान के एक AWACS विमान को करीब 314 किलोमीटर की दूरी पर निशाना बनाए जाने की मंजूरी से जुड़ी जानकारी भी साझा की थी. ऑपरेशन के बाद जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आदमपुर एयरबेस पहुंचे थे, तब एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र भी उनके साथ मौजूद थे.

यानी जिस अधिकारी ने हाल तक देश की पश्चिमी सीमा पर हवाई सुरक्षा की बड़ी जिम्मेदारी संभाली, अब वही अयोध्या में राम मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था को दिशा देंगे.

सैन्य करियर में मिले कई बड़े सम्मान

जितेंद्र मिश्र के खाते में सिर्फ बड़ी जिम्मेदारियां ही नहीं, बल्कि कई महत्वपूर्ण सैन्य सम्मान भी हैं. उन्हें सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल यानी SYSM, अति विशिष्ट सेवा मेडल यानी AVSM और विशिष्ट सेवा मेडल यानी VSM से सम्मानित किया जा चुका है. इन सम्मानों के पीछे उनके लंबे सैन्य करियर, नेतृत्व क्षमता और सेवा का रिकॉर्ड रहा है.

आखिर राम मंदिर को CEO की जरूरत क्यों पड़ी?

इस नियुक्ति को समझने के लिए अयोध्या में बदलती तस्वीर को देखना होगा. राम मंदिर के निर्माण के बाद अयोध्या में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बड़ा मुद्दा बनी हुई है. मंदिर के संचालन से जुड़ी व्यवस्थाएं भी पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा विस्तृत हो चुकी हैं.

दान और चढ़ावे की निगरानी से लेकर वित्तीय प्रबंधन तक. मंदिर की संपत्तियों से लेकर कानूनी मामलों तक. सुरक्षा, कर्मचारी, प्रशासन और भविष्य की परियोजनाएं भी इसी दायरे में आती हैं. हाल के दिनों में चढ़ावे से जुड़ी चोरी के विवाद ने भी मंदिर की व्यवस्थाओं और निगरानी को लेकर सवाल खड़े किए थे.

ऐसे माहौल में ट्रस्ट का एक पूर्णकालिक CEO नियुक्त करना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि अब मंदिर प्रशासन को संस्थागत और पेशेवर तरीके से चलाने पर जोर दिया जा रहा है. और इसके लिए जिस शख्स को चुना गया है, उसके पास बड़े संस्थान को कमांड करने और बेहद संवेदनशील परिस्थितियों में फैसले लेने का लंबा अनुभव है.

देवरिया के गांव से अयोध्या तक

जितेंद्र मिश्र की कहानी का एक और पहलू दिलचस्प है. वे उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के भाटपार रानी क्षेत्र के भोपतपुरा गांव से आते हैं. एक छोटे से गांव से निकलकर भारतीय वायुसेना में फाइटर पायलट बनना, फिर टेस्ट पायलट और फाइटर कॉम्बैट लीडर की भूमिका निभाना, वेस्टर्न एयर कमांड की कमान संभालना और अब राम मंदिर ट्रस्ट के पहले CEO की जिम्मेदारी तक पहुंचना. उनका करियर अपने आप में एक लंबी यात्रा है. अब इस यात्रा का अगला पड़ाव अयोध्या है.

चुनौती सिर्फ मंदिर चलाने की नहीं है

जितेंद्र मिश्र के सामने चुनौती सिर्फ राम मंदिर का रोजमर्रा का प्रशासन संभालने की नहीं होगी. उनके सामने एक ऐसी व्यवस्था तैयार करने की जिम्मेदारी होगी, जो आने वाले दशकों में भी उसी तरह काम कर सके. राम मंदिर अब सिर्फ एक निर्माण परियोजना नहीं है. यह करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है और इसके साथ जुड़ी व्यवस्थाओं का आकार लगातार बढ़ रहा है.

ऐसे में ट्रस्ट ने जिस व्यक्ति को पहली बार CEO की कुर्सी सौंपी है, उसका सैन्य बैकग्राउंड अपने आप में एक संदेश देता है. अब राम मंदिर की व्यवस्था में भी कमान, अनुशासन और पेशेवर प्रबंधन का दौर शुरू हो सकता है.

और आने वाले दिनों में सबसे दिलचस्प सवाल यही होगा कि एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र अपनी सैन्य कमांड का अनुभव अयोध्या के इस बेहद संवेदनशील और विशाल प्रशासनिक तंत्र में किस तरह उतारते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Cricket Live

Horoscope

Share Market