मुकेश कुमार गजेंद्र, वरिष्ठ फिल्म पत्रकार
Daayra Movie Review: साउथ सिनेमा के सुपर स्टार पृथ्वीराज सुकुमारन और बॉलीवुड एक्ट्रेस करीना कपूर की फ़िल्म ‘दायरा’ सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है. इसे औसत से बेहतर फिल्म कहा जा सकता है, जो पूरी तरह से पृथ्वीराज सुकुमारन के दमदार अभिनय पर टिकी हुई नजर आती है. फिल्म के लगभग हर दृश्य में पृथ्वीराज अपने किरदार को मजबूती के साथ निभाते हैं और हर फ्रेम में प्रभावशाली नजर आते हैं.
फिल्म की कहानी 2019 के हैदराबाद गैंगरेप और मर्डर केस से प्रेरित है. यह मामला पहले से ही लोगों के बीच काफी चर्चित रहा है, इसलिए दर्शकों के लिए इसमें रहस्य की गुंजाइश सीमित रह जाती है. फिल्म की दिशा और घटनाक्रम को लेकर बहुत बड़ा सस्पेंस नहीं बनता, लेकिन दूसरे हाफ में रोमांच जरूर बढ़ता है.
कहानी की एक खास बात यह है कि इस मामले की जांच के दौरान उन्हीं अपराधियों से जुड़े कई पुराने केस भी सामने आते हैं. फिल्म पुलिस सिस्टम की खामियों और अधिकारियों की लापरवाही पर भी सवाल उठाती है. इस पहलू को प्रभावी ढंग से दिखाया गया है और यह फिल्म का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनकर उभरता है.
फिल्म का पहला हाफ थोड़ा सुस्त है. घटनाओं को स्थापित करने में समय लगता है और कहानी की रफ्तार कुछ जगह धीमी महसूस होती है. लेकिन दूसरे हाफ में फिल्म तेजी से अपनी पकड़ बनाती है. खासकर वारदात का दृश्य और एनकाउंटर सीक्वेंस प्रभावशाली हैं. घटना की विभत्सता को जिस तरह पर्दे पर दिखाया गया है, वह दर्शकों को असहज करने के साथ-साथ कहानी की गंभीरता का एहसास भी कराता है.
पृथ्वीराज सुकुमारन फिल्म में पूरी तरह छाए हुए हैं. उनका अभिनय किरदार की गंभीरता, गुस्से और अंदरूनी तनाव को मजबूती से सामने लाता है. दूसरी ओर, करीना कपूर खान ग्रेसफुल नजर आती हैं, लेकिन उनके किरदार के पास बहुत कुछ करने का मौका नहीं है. सुकुमारऩ के किरदार के आगे उनका प्रदर्शन उम्मीद के मुकाबले औसत लगता है. सहायक कलाकारों ने हालांकि अच्छा काम किया है और कहानी को जरूरी सपोर्ट दिया है.
फिल्म की एक दिलचस्प बात यह भी है कि करीना कपूर खान और पृथ्वीराज सुकुमारन पूरी फिल्म में सिर्फ एक बार आमने-सामने आते हैं. इसके अलावा दोनों के दृश्य अलग-अलग हैं. यह प्रयोग कहानी के लिहाज से अलग जरूर है, लेकिन दर्शक दोनों कलाकारों को साथ देखने की उम्मीद कर रहे थे.
संगीत फिल्म का एक खूबसूरत पक्ष है. फिल्म का गीत दिल छू लेता है. खासकर गुलजार के शब्द और बी. प्राक की आवाज का जादू सुनने को मिलता है. यह गीत फिल्म के भावनात्मक पक्ष को मजबूत करता है.
मेघना गुलजार इससे पहले राज़ी और तलवार जैसी बेहतरीन फिल्मों का निर्देशन कर चुकी हैं. उनकी फिल्मों में कहानी और संवेदनशीलता का मजबूत मेल देखने को मिलता है. दायरा में भी विषय गंभीर है, लेकिन अगर पहला हाफ थोड़ा और कसाव के साथ संभाला गया होता, तो फिल्म का प्रभाव कहीं ज्यादा दमदार हो सकता था.
कुल मिलाकर, ‘दायरा’ एक बार देखी जा सकने वाली सामाजिक संदेश देने वाली एक अच्छी फिल्म है. इसे देखने की सबसे बड़ी वजह पृथ्वीराज सुकुमारन का शानदार अभिनय है. फिल्म पुलिस सिस्टम की खामियों और लापरवाही पर सवाल जरूर उठाती है, इसलिए पुलिस व्यवस्था और अपराध की जांच से जुड़े लोगों के लिए भी यह एक विचार करने वाला अनुभव हो सकता है. फिल्म दो महीने बाद नेटफ्लिक्स पर भी रिलीज होने वाली है.
रेटिंग: ⭐⭐⭐








