October 2, 2026 4:05 am

जानिए कैसी है अजय देवगन-जयदीप अहलावत की फिल्म ‘दृश्यम: द कन्क्लूजन’?

Drishyam The Conclusion Review

Drishyam The Conclusion Movie Review: ‘दृश्यम’ की दुनिया में वापस लौटना अपने आप में बड़ी उम्मीद लेकर आता है. लेकिन अच्छी बात यह है कि ‘दृश्यम: द कन्क्लूजन’ सिर्फ पिछली फिल्मों की कामयाबी को भुनाने की कोशिश नहीं करती. फिल्म अपनी कहानी को नए मोड़ देती है और धीरे-धीरे ऐसा जाल बुनती है कि दर्शक लगातार सोचता रहता है कि अब आगे क्या होगा.

फिल्म के निर्देशक अभिषेक पाठक ने कहानी को बहुत संभलकर आगे बढ़ाया है. फिल्म जल्दबाजी नहीं करती और इसी वजह से कई छोटे-छोटे पल आगे जाकर मायने रखने लगते हैं. खास बात यह है कि इस बार कहानी में पुराने अंदाज की झलक तो है, लेकिन घटनाएं उसी ढर्रे पर आगे नहीं बढ़तीं.

फिल्म का फर्स्ट हॉफ जबरदस्त है. अजय देवगन और जयदीप अहलावत जब आमने-सामने आते हैं तो पर्दे पर तनाव साफ महसूस होता है. दोनों के बीच का टकराव सिर्फ संवादों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उनकी आंखों और बॉडी लैंग्वेज में भी दिखाई देता है. यही हिस्सा फिल्म को एक अलग रफ्तार देता है.

कोर्टरूम वाले सीक्वेंस भी कहानी में खूब जान डालते हैं. यहां सवाल सिर्फ यह नहीं है कि सच क्या है, बल्कि बड़ा सवाल यह बन जाता है कि सच सामने आएगा कैसे. प्रकाश राज और अजय देवगन के बीच के शुरुआती दृश्य भी काफी असर छोड़ते हैं.

फिल्म अपने अंतिम पड़ाव तक कई सवाल खड़े करती है और दर्शक इंतजार करता रहता है कि इनका जवाब कैसे मिलेगा. अच्छी बात यह है कि आखिरी हिस्से में कहानी बिखरती नहीं, बल्कि अपने सारे पत्ते एक-एक करके खोलती है. अजय देवगन एक बार फिर विजय सालगांवकर के किरदार में छा गए हैं. उनका किरदार ज्यादा बोलने के बजाय परिस्थितियों को समझता है, इंतजार करता है और फिर अपनी चाल चलता है. उनकी आंखें सबकुछ बयां कर देती हैं. उनका यही अंदाज उनके किरदार को इतना दिलचस्प बनाता है.

फिल्म फ्रेंचाइजी के दूसरे पार्ट में आईजी की भूमिका में नजर आए अक्षय खन्ना को रिप्लेस करने वाले अभिनेता जयदीप अहलावत कहीं भी उनकी कमी अखरने नहीं देते, बल्कि बेहद मजबूती के साथ नजर आते हैं. राजवीर सिंह तोमर एसपी क्राइम ब्रांच के किरदार पहले सीन से लेकर आखिरी सीन तक धांसू लगते हैं.

मीरा देशमुख के किरदार में तब्बू ने हमेशा की तरह शानदार अभिनय किया है. पॉवरफुल होते हुए भी एक बेबस मां का गुस्सा, पुराना दर्द और बदले की भावना उनके अभिनय में साफ दिखाई देती है. प्रकाश राज सेकेंड हॉफ के बाद फिल्म में आते हैं और आते ही छा जाते हैं. पब्लिक प्रॉसिक्यूटर के किरदार को उन्होंने जीवंत कर दिया है.

श्रिया सरन, रजत कपूर, इशिता दत्ता ने भी अपने किरदारों के साथ न्याय किया है. इस बार सबसे ज्यादा चौंकाया है कमलेश सावंत ने, जो कि फिल्म के पहले पार्ट से हैं. इंस्पेक्टर लक्ष्मीकांत गायतोंडे के किरदार में अहम भूमिका निभाते हैं. इस बार उनको फिल्म में बहुत ज्यादा स्पेस मिला है. उनकी कॉमिक टाइमिंग गजब की लगती है.

फिल्म में गानों की कोई खास जरूरत नहीं थी और कहानी भी इसकी मांग नहीं करती. इसकी बजाय बैकग्राउंड स्कोर पूरे समय माहौल को जरूर मजबूत बनाए रखता है. हर महत्वपूर्ण मोड़ पर बेचैनी और रोमांच को और गहरा करता है.

कुल मिलाकर ‘दृश्यम: द कन्क्लूजन’ ऐसी फिल्म है जो दर्शक को सिर्फ कहानी देखने नहीं देती, बल्कि उसे लगातार कहानी का हिस्सा बनाकर रखती है. विजय सालगांवकर की दुनिया का यह अध्याय रोमांच, रहस्य और भावनाओं के साथ एक मजबूत अंत तक पहुंचता है. दृश्यम फिल्म फ्रेंचाइजी की इसे सबसे बेहतरीन फिल्म कहा जा सकता है.

मेरी रेटिंग:- ⭐⭐⭐⭐½

मुकेश कुमार गजेंद्र, वरिष्ठ फिल्म पत्रकार, फेसबुक से साभार

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Cricket Live

Horoscope

Share Market