August 10, 2026 10:24 am

JPSC विवाद पर नहीं बनी बात, CBI जांच की मांग पर अड़े छात्र

झारखंड में JPSC-JSSC अभ्यर्थियों और राज्य सरकार के बीच कई दौर की बातचीत के बावजूद गतिरोध खत्म नहीं हो पाया है. सरकार की ओर से 14वीं JPSC परीक्षा रद्द करने, कथित गड़बड़ियों की जांच कराने और भर्ती प्रक्रिया में सुधार जैसे कई कदम उठाने पर सहमति जताई गई है.

रविवार को सरकार और प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों के बीच हुई बातचीत बेनतीजा रहने के बाद छात्र नेताओं ने आंदोलन को आगे बढ़ाने का ऐलान किया. प्रदर्शनकारियों ने 10 अगस्त को झारखंड विधानसभा की ओर बड़े मार्च का आह्वान किया है. छात्र नेताओं का दावा है कि इस मार्च में बड़ी संख्या में JPSC-JSSC अभ्यर्थी शामिल होंगे.

सरकारी पैनल के साथ बैठक के बाद छात्र नेताओं ने कहा कि उनकी मुख्य मांगों का अब तक समाधान नहीं हुआ है. खास तौर पर JSSC CGL और अन्य परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की CBI जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर छात्र पीछे हटने को तैयार नहीं हैं.

छात्र नेताओं ने कहा, “जब तक CBI जांच की घोषणा नहीं हो जाती, हम किसी भी समझौते के लिए तैयार नहीं हैं.” उन्होंने 10 अगस्त को झारखंड विधानसभा तक मार्च करने का ऐलान किया है.

सरकार और छात्रों के बीच बातचीत में JSSC CGL परीक्षा को रद्द करने का मुद्दा भी बड़ा विवाद बना हुआ है. झारखंड के मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने कहा कि सरकार प्रदर्शनकारियों की मांग पर एकतरफा तरीके से CGL परीक्षा रद्द नहीं कर सकती.

सरकार का कहना है कि यह परीक्षा हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत आयोजित हुई थी और पूरी प्रक्रिया न्यायिक निगरानी में रही है. इसके अलावा परीक्षा के परिणाम घोषित किए जा चुके हैं और सफल अभ्यर्थी सरकारी सेवाओं में शामिल भी हो चुके हैं.

सरकार ने CGL में कथित गड़बड़ियों की जांच की निगरानी के लिए एक रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में मॉनिटरिंग कमेटी बनाने का प्रस्ताव दिया है. हालांकि, छात्र नेताओं ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया.

सरकार का दावा है कि तीन दिनों तक चली बातचीत और विचार-विमर्श के बाद उसने अभ्यर्थियों की करीब 98 फीसदी मांगों को मान लिया है. मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू के मुताबिक, सरकार ने 14वीं JPSC परीक्षा और 2023-25 की बैकलॉग भर्तियों से जुड़ी कथित गड़बड़ियों की जांच कराने का फैसला किया है.

सरकार के मुताबिक, मामले के आपराधिक पहलुओं की जांच CID करेगी. वहीं संदिग्ध अवैध वित्तीय लेनदेन की जांच के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ED) से कार्रवाई का अनुरोध किया जाएगा.

सरकार ने कथित गड़बड़ियों से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाने का भी प्रस्ताव रखा है. साथ ही आरोपियों के खिलाफ 90 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल करने की बात कही गई है.

भर्ती प्रक्रिया में लंबे समय के सुधार के लिए IIT-ISM, IIM रांची और XLRI के विशेषज्ञों वाली एक कमेटी गठित करने का प्रस्ताव भी रखा गया है. इसका उद्देश्य भर्ती प्रक्रिया को ज्यादा पारदर्शी और भरोसेमंद बनाना है.

सरकार की ओर से कई मांगों पर कदम उठाए जाने के बावजूद छात्र नेता CBI जांच और CGL परीक्षा रद्द करने की मांग पर कायम हैं. दोनों पक्षों के बीच बातचीत से फिलहाल कोई अंतिम समाधान नहीं निकल पाया है.

छात्रों ने साफ कर दिया है कि जब तक CBI जांच की घोषणा नहीं होती, उनका आंदोलन जारी रहेगा. इसी कड़ी में 10 अगस्त को झारखंड विधानसभा तक प्रस्तावित मार्च को आंदोलन के अगले बड़े चरण के तौर पर देखा जा रहा है.

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