Air India: 4 अगस्त की वो उड़ान सामान्य थी. फुकेत से दिल्ली के लिए Airbus A320 ने उड़ान भरी थी. विमान में 137 यात्री थे और 8 क्रू मेंबर. यानी कुल 145 लोग आसमान में थे. किसी को अंदाजा नहीं था कि कुछ देर बाद यही सफर एक ऐसी जांच में बदलने वाला है, जिसमें सवाल सिर्फ टर्बुलेंस का नहीं, बल्कि विमान के सिस्टम और कॉकपिट के अंदर की परिस्थितियों का भी है.
विमान क्रूजिंग एल्टीट्यूड पर था. तभी अचानक विमान ने करीब 300 फीट की ऊंचाई में बदलाव महसूस किया. झटका लगा. यात्रियों में अफरा-तफरी मची. बाद में सामने आया कि 20 यात्रियों और 4 केबिन क्रू मेंबर को चोटें आईं. लेकिन कहानी यहां खत्म नहीं होती. असल सवाल उस वक्त शुरू होता है, जब विमान की पोस्ट-फ्लाइट मेंटेनेंस रिपोर्ट सामने आती है.
तीन हाइड्रोलिक अलर्ट
AI2379 को ऑपरेट कर रहे Airbus A320, VT-EXO की लैंडिंग के बाद तैयार किए गए मेंटेनेंस रिकॉर्ड में उड़ान के दौरान बेहद कम अंतराल में तीन हाइड्रोलिक लो-प्रेशर वॉर्निंग दर्ज होने की बात सामने आई है. सबसे दिलचस्प बात यह है कि ये चेतावनियां विमान के तीन अलग-अलग हाइड्रोलिक सिस्टम से जुड़ी थीं. ग्रीन, येलो और ब्लू. यानी विमान के हाइड्रोलिक सिस्टम से जुड़े अलग-अलग अलर्ट रिकॉर्ड हुए. इसके तुरंत बाद एक और ऐसा अलर्ट आया, जिसने जांच को और गंभीर बना दिया.
ऑटोपायलट डिस्कनेक्ट
रिकॉर्ड के मुताबिक, हाइड्रोलिक अलर्ट के बाद ऑटोपायलट ऑफ होने की चेतावनी दर्ज हुई. इसके बाद लैंडिंग से पहले दोबारा ऑटोपायलट ऑफ होने का अलर्ट भी रिकॉर्ड में आया. यही वो हिस्सा है, जिस पर अब जांचकर्ताओं की खास नजर है.
क्या ये सभी घटनाएं एक-दूसरे से जुड़ी थीं?
क्या टर्बुलेंस के दौरान विमान के सिस्टम पर किसी तरह का असर पड़ा? या फिर अलग-अलग तकनीकी चेतावनियां एक ही समय में सामने आईं? इन सवालों के जवाब अभी जांच के दायरे में हैं.
सामने आया कॉकपिट का वो दावा…
इस कहानी का सबसे संवेदनशील और चौंकाने वाला हिस्सा कॉकपिट से जुड़ा है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, केबिन क्रू के एक सदस्य ने उड़ान से पहले पायलट के खिलाफ लिखित शिकायत की थी. शिकायत में पायलट पर गांजा पीने का आरोप लगाया गया. हालांकि, पायलट ने किसी भी नशीले पदार्थ के सेवन से इनकार किया है.
इस घटना के बाद दोनों पायलटों का साइकोएक्टिव सब्सटेंस टेस्ट कराया गया और जांच पूरी होने तक दोनों को फ्लाइंग ड्यूटी से हटा दिया गया. सूत्रों के मुताबिक, पायलट-इन-कमांड की कन्फर्मेटरी लैबोरेटरी स्क्रीनिंग में मारिजुआना के लिए पॉजिटिव रिजल्ट मिलने की बात भी जांच का हिस्सा है. लेकिन यहां एक बेहद महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है. टेस्ट में किसी पदार्थ की मौजूदगी और उड़ान के दौरान उसके प्रभाव में होने की बात एक जैसी नहीं होती.
यही वजह है कि जांच एजेंसियां मेडिकल रिपोर्ट, टाइमलाइन और फ्लाइट डेटा को साथ रखकर देख रही हैं. अभी इसे अंतिम वजह मान लेना जल्दबाजी होगी.
300 फीट का वो अचानक बदलाव
AI2379 में जिस वक्त करीब 300 फीट का अचानक बदलाव महसूस हुआ, उस समय विमान हवा में था और यात्री अपनी सीटों पर थे. कुछ सेकेंड के भीतर हालात बदल गए. विमान में बैठे लोगों को झटका महसूस हुआ. कुछ यात्री और केबिन क्रू घायल हुए. लेकिन सूत्रों के मुताबिक, इसी दौरान कॉकपिट में भी ऐसी स्थिति बनी, जिसने जांच को और पेचीदा कर दिया. बताया जा रहा है कि मुख्य पायलट यानी Pilot-in-Command कॉकपिट के फर्श पर पड़े मिले.
यानी एक तरफ विमान ऊंचाई में अचानक बदलाव से गुजर रहा था, दूसरी तरफ कॉकपिट में पायलट की स्थिति को लेकर भी सवाल उठ रहे थे. अब जांचकर्ता इस पूरी टाइमलाइन को सेकेंड-दर-सेकेंड जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं.
किस समय टर्बुलेंस आया?
किस समय हाइड्रोलिक अलर्ट रिकॉर्ड हुआ?
ऑटोपायलट कब डिस्कनेक्ट हुआ?
पायलट की स्थिति उस वक्त क्या थी?
और सबसे अहम…
क्या इन घटनाओं के बीच कोई सीधा कनेक्शन था?
दिल्ली तक करीब 1 घंटे 20 मिनट की उड़ान
मेंटेनेंस रिकॉर्ड में दर्ज समय के मुताबिक, शुरुआती हाइड्रोलिक वॉर्निंग के बाद विमान करीब 1 घंटे 20 मिनट तक हवा में रहा और इसके बाद दिल्ली में सुरक्षित लैंड किया. यानी जिस विमान में सिस्टम अलर्ट दर्ज हो चुके थे, वह तत्काल आसमान से बाहर नहीं आया. विमान ने अपनी यात्रा जारी रखी और दिल्ली पहुंचा. यही वजह है कि अब जांच सिर्फ उस एक झटके तक सीमित नहीं है.
AAIB यानी Aircraft Accident Investigation Bureau फ्लाइट डेटा, विमान के सिस्टम, ऑपरेशनल रिकॉर्ड, मेंटेनेंस हिस्ट्री, मेडिकल जानकारी और दूसरे सबूतों को एक साथ देख रहा है. फिलहाल किसी एक वजह को जिम्मेदार ठहराना जांच पूरी होने से पहले सही नहीं होगा.
क्या टर्बुलेंस वजह था या सिर्फ एक हिस्सा?
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल शायद यही है. क्या विमान में आया अचानक 300 फीट का बदलाव सिर्फ टर्बुलेंस की वजह से था? क्या हाइड्रोलिक सिस्टम के अलर्ट उसी घटना से जुड़े थे? क्या ऑटोपायलट डिस्कनेक्शन किसी तकनीकी समस्या का नतीजा था? या फिर कॉकपिट में पायलट की स्थिति ने घटनाओं की पूरी श्रृंखला को प्रभावित किया? इन सवालों का जवाब फ्लाइट डेटा और तकनीकी जांच से ही मिलेगा.
AAIB पहले ही संकेत दे चुका है कि जांच पूरी तरह सबूतों के आधार पर की जा रही है और अलग-अलग जानकारियों को जोड़कर समय से पहले निष्कर्ष निकालने से बचना चाहिए.
जांच अब सिर्फ विमान की नहीं, इंसानी फैक्टर की भी
इस केस में जांच का दायरा इसलिए भी बढ़ गया है क्योंकि एक ही घटना में कई अलग-अलग एंगल सामने आए हैं. एक तरफ विमान के हाइड्रोलिक सिस्टम के अलर्ट हैं. दूसरी तरफ ऑटोपायलट डिस्कनेक्शन. तीसरी तरफ अचानक ऊंचाई में बदलाव. चौथी तरफ कॉकपिट में पायलट की स्थिति. और अब मेडिकल स्क्रीनिंग से जुड़ी जानकारी.
यानी जांचकर्ताओं के सामने सिर्फ यह सवाल नहीं है कि विमान क्यों हिला.








