August 10, 2026 9:31 pm

Operation Safed Sagar Review: शोर नहीं, देशभक्ति का जोर, जुदा है कारगिल जंग की ये कहानी

Operation Safed Sagar

1999 की कारगिल जंग पर कई फिल्में और वेब सीरीज बन चुकी हैं. ज्यादातर कहानियां भारतीय थल सेना के अफसरों और जवानों के इर्द-गिर्द रची गई हैं, लेकिन ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ की कहानी ‘आसमान’ छूती है. ये वेब सीरीज कारगिल वॉर में भारतीय वायुसेना के उस अहम योगदान को दिखाती है, जिसके बारे में दर्शक बहुत कम जानते रहे हैं.

ओनी सेन के निर्देशन में बनी यह 6 एपिसोड की वेब सीरीज सिर्फ लड़ाकू विमानों और हवाई हमलों की कहानी नहीं है. इसमें उन पायलटों की जिंदगी भी दिखाई गई है, जिन्हें हर मिशन के साथ अपनी जान जोखिम में डालनी होती है. इसमें सबसे अच्छी बात ये लगती है कि सीरीज देशभक्ति दिखाने के लिए हर वक्त जोर के नारे लगाने या सिर्फ दुश्मन के खिलाफ नफरत नहीं दिखाती.

कितनी असरदार है कहानी

‘ऑपरेशन सफेद सागर’ कारगिल युद्ध के दौरान भारतीय वायुसेना के पराक्रम की कहानी पर आधारित है. इसमें कई वास्तविक नाम और घटनाएं शामिल की गई हैं. अजय आहूजा, नचिकेता जैसे किरदारों के साथ उस समय के राजनीतिक घटनाक्रम को भी कहानी का हिस्सा बनाया गया है.

अटल बिहारी वाजपेयी की लाहौर बस यात्रा से लेकर परवेज मुशर्रफ और नवाज शरीफ के बीच चल रही खींचतान तक, सीरीज युद्ध के पीछे की कहानी को भी समझाने की कोशिश करती है. इनकी वजह से कहानी में भरोसा पैदा होता है. हालांकि, कुछ जगहों पर घटनाएं समझाने की कोशिश में ड्रामा थोड़ा पीछे छूट जाता है. कई बार ऐसा लगता है कि किरदार बातचीत कम और जानकारी ज्यादा दे रहे हैं.

सबसे मजबूत पहलू एक्शन

इस वेब सीरीज का सबसे मजबूत पहलू हवाई एक्शन है. भारतीय सिनेमा में पिछले कुछ वर्षों में कई फिल्मों में लड़ाकू विमानों का एक्शन देखने को मिला है. ऐसे में ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ के सामने तुलना होना तय है. अच्छी बात यह है कि सीमित बजट के बावजूद ये सीरीज कई जगह इन फिल्मों से आगे निकलती नजर आती है.

कॉकपिट के अंदर बैठे पायलट, अचानक बदलती परिस्थितियां और कुछ सेकेंड में लिए जाने वाले फैसले तनाव पैदा करते हैं. जब फाइटर जेट पहाड़ों के बीच से गुजरते हैं तो सीन रोमांच पैदा करते हैं. हां, कुछ जगह CGI साफ दिखाई देता है. लेकिन इतना जरूर है कि यह कमी पूरी सीरीज के एक्शन पर भारी नहीं पड़ती.

सिद्धार्थ-जिमी ने संभाली कमान

सिद्धार्थ ने फ्लाइट कमांडर अजय आहूजा का किरदार निभाया है. वह इस भूमिका में काफी सहज लगते हैं. उनका किरदार न तो जरूरत से ज्यादा हीरो बनाया गया है और न ही बेवजह भावुक. जिमी शेरगिल हमेशा की तरह भरोसेमंद हैं. दोनों के बीच की केमिस्ट्री कहानी को आगे बढ़ाती है.

अभय वर्मा, मिहिर आहुजा, तारुक रैना और अर्नव भसीन जैसे युवा कलाकार भी अपने हिस्से का काम ठीक से करते हैं. वहीं मनु ऋषि चड्ढा मुशर्रफ के किरदार में खास तौर पर ध्यान खींचते हैं. महिला किरदारों को हालांकि ज्यादा जगह नहीं मिली है. दिया मिर्जा, अमृता बागची और प्राजक्ता कोली के किरदार ज्यादातर अपने सैनिक साथियों के इंतजार और परिवार की चिंता तक सीमित हैं. इनमें अमृता बागची को मिला भावनात्मक हिस्सा सबसे ज्यादा असर छोड़ता है.

देशभक्ति है, लेकिन शोर नहीं

सीरीज की सबसे अच्छी बात ये है कि इसमें शोर नहीं है. यह भारतीय सैनिकों की बहादुरी दिखाती है, लेकिन हर सीन में पाकिस्तान विरोधी डायलॉग डालने की कोशिश नहीं करती. युद्ध और देशभक्ति को ज्यादा स्वाभाविक तरीके से दिखाया गया है. यही वजह है कि जब कोई पायलट मुश्किल मिशन पर निकलता है या कोई जवान खतरे में पड़ता है, तो उसका असर ज्यादा महसूस होता है.

ये वेब सीरीज यह भी याद दिलाती है कि युद्ध सिर्फ सीमा पर लड़ने वाले सैनिकों की कहानी नहीं है. उनके पीछे परिवार होते हैं, जो हर फोन कॉल और हर खबर का इंतजार करते हैं. सैनिकों की पत्नियों और परिवारों की बेचैनी वाले हिस्से इसी वजह से कहानी को भावनात्मक बनाते हैं.

कहां कमजोर पड़ती है सीरीज

इस वेब सीरीज में सब बेहतर है, ये कहना न्यायसंगत नहीं होगा. कुछ डायलॉग जरूरत से ज्यादा लिखे हुए लगते हैं. कई जगह कहानी को आगे बढ़ाने के बजाय दर्शक को समझाने पर ज्यादा जोर दिया गया है. इससे कुछ हिस्से थोड़े धीमे हो जाते हैं. विदेशी किरदारों का चित्रण भी बहुत स्वाभाविक नहीं लगता. कुछ किरदार और दृश्य ऐसे हैं जिन्हें देखकर लगता है कि उन्हें कहानी में सिर्फ इसलिए रखा गया है ताकि उस दौर की बड़ी तस्वीर पूरी हो सके.

लेकिन ये कमियां इतनी बड़ी नहीं हैं कि सीरीज का असर खत्म हो जाए.

अंतिम राय

‘ऑपरेशन सफेद सागर’ कोई ऐसी वॉर सीरीज नहीं है जिसे देखते हुए हर पांच मिनट में देशभक्ति का जोश पैदा करने की कोशिश की गई हो. यह ज्यादा शांत तरीके से अपनी बात कहती है. इसकी सबसे बड़ी ताकत है—सिद्धार्थ और जिमी शेरगिल का अभिनय, कारगिल युद्ध की पृष्ठभूमि, वास्तविक घटनाओं पर पकड़ और सबसे बढ़कर इसके हवाई एक्शन सीक्वेंस.

अगर लक्ष्य, शेरशाह और LOC ने कारगिल को जमीन से दिखाया था, तो ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ उसी जंग को आसमान से देखने का मौका देती है. कुछ जगहों पर कहानी धीमी जरूर पड़ती है, लेकिन कुल मिलाकर यह एक अच्छी और देखने लायक वॉर सीरीज है. खासकर यदि आपको भारतीय वायुसेना और रियल घटनाओं पर बनी कहानियां पसंद हैं, तो इसे जरूर देखा जा सकता है.

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