वर्तमान में जियो! इस क्षण के अतिरिक्त और कुछ भी सत्य नहीं है…

नेशनल न्यूज नेटवर्क Edited by: [डेस्क] नई दिल्ली
February 25, 2018 5:52 pm

कोई इससे राजी नहीं होगा कि अशांत होना कठिन है। लोग कहेंगे, अशांत तो हम हैं ही, इसमें कठिन क्या है? यदि कुछ कठिन है तो वह है शांत होना। लेकिन हम थोड़ा ओशो की रोशन नज़र से देखें तो धीरे-धीरे रास्ता खुलने लगेगा। वे कहते हैं कि सबसे पहले, अशांत होने के लिए अतीत का स्मरण चाहिए, और भविष्य का भाव चाहिए। वह जो दस साल पहले किसी ने गाली दी थी, वह अभी भी चुभनी चाहिए। वस्तुत: गाली भी गई, देने वाले भी गए, समय भी गया, मगर हम भीतर चुभाए बैठे हैं। हम उसे ढो रहे हैं।

 

वर्षों पहले की याददाश्तें आपके चित्त पर बोझिल होनी चाहिए तभी आप अशांत हो सकते हैं। और भविष्य की कल्पना होनी चाहिए कि कल ऐसा करेंगे, परसों ऐसा करेंगे। आदमी भविष्य की कल्पना करके भी अशांति खड़ी करता है और फिर भविष्य में ही शांत होने की योजना भी बनाता है। उससे अशांति और कई गुनी हो जाती है। और भविष्य को हम फैलाए चले जाते हैं।

 

इस जन्म में ही नहीं, हम अगले जन्मों में भी फैलाते हैं। अब छाती पर सोचें कितना बोझ पड़ता है। आदमी टूट जाता है। भविष्य की कल्पना और अतीत की स्मृतियां के चक्की के पाट के बीच जो फंस जाता है वह बच नहीं पाता। जरा देखिए तो, अशांत होने के लिए आप कितनी मेहनत कर रहे हैं!

 

चक्की के ये दोनों ही पाट झूठे हैं। अतीत जा चुका, अब नहीं है और भविष्य अभी आया नहीं। सच सिर्फ वर्तमान है, यह क्षण है। अतीत में जीने का मतलब हम पुराने नोट भुनाने की कोशिश रहे हैं जो अभी चल नहीं सकते। जीवन नगद है, उधार नहीं। थोड़ा मन के भीतर डुबकी लगाएं, न अतीत को, न भविष्य को आने दें, पाएंगे यह क्षण ही असली है। इस क्षण में अशांति कैसे खोज पाएंगे? चेष्टा करके भी अशांत न हो सकेंगे।

साभार- दैनिक भास्कर

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