नहाय-खाय के साथ महापर्व छठ शुरू, 34 साल बाद बना ऐसा महासंयोग, जानिए पूजा विधि और महत्व

मधु शर्मा Edited by: [सौरभ कुमार] नई दिल्ली
October 23, 2017 4:18 pm

24 अक्टूबर से छठ महापर्व की शुरूआत हो चुकी है. इस बार यह मंगलवार को कार्तिक मास की शुक्ल चतुर्थी से शुरू हुआ है. छठ के पहले दिन यानी कि नहाय खाय के दिन गणेश चतुर्थी भी है. दूसरे दिन 25 अक्टूबर बुधवार पंचमी को खरना मनाया गया. तीसरे दिन 26 अक्टूबर गुरुवार षष्ठी को शाम को जल में खड़े होकर डूबते सूर्य को संझिया अर्ध्य दिया जाएगा.

 

27 अक्टूबर शुक्रवार सप्तमी की सुबह तड़के जल में प्रवेश कर उगते सूर्य को अर्ध्य दिया जाएगा. छठ बहुत कठिन और सावधानी का पर्व होता है. छठी मैया बहुत से लोगों की हर मनोकामना पहले ही पूरी कर देती हैं. लोग फिर अपनी मन्नत पूरी होने पर छठ की व्रत पूजा करते हैं. इसे दुनिया का सबसे कठिन व्रत कहा जाता है. दो दिनों तक निर्जल व्रत रखना होता है.

 

इस बार का छठ पर्व तो बेहद खास है. क्योंकि इस बार छठ पर 34 साल बाद एक महासंयोग बन रहा है. दरअसल चार दिनों की छठ पूजा के पहले दिन यानी नहाय खाय पर सूर्य का रवियोग बन रहा है. छठ पर रवियोग का बनना काफी शुभ माना जाता है. शास्त्रों के अनुसार रवियोग में छठ पूजा शुरू होने से भक्तों की हर मनोकामना पूरी होती है.

 

नहाय-खाय की विधि
– सबसे पहले घर की पूरी साफ-सफाई कर लें. सुबह नदी तालाब, कुआं या चापा कल में नहा कर शुद्ध साफ वस्त्र पहनते हैं. अगर घर के पास गंगा जी हैं तो नहाय खाय के दिन गंगा स्नान जरूर करें. यह बहुत ही शुभ होता है.
– छठ करने वाली व्रती महिला या पुरुष चने की दाल और लौकी शुद्ध घी में सब्जी बनाती है. उसमें सेंधा शुद्ध नमक ही डालते हैं.
– बासमती शुद्ध अरवा चावल बनाते हैं. गणेश जी और सूर्य को भोग लगाकर व्रती सेवन करती हैं.
– घर के सभी सदस्य भी यही खाते हैं.
– घर के सदस्य को मांस मदिरा का सेवन बिल्कुल नहीं करना. रात को भी घर के सदस्य पूड़ी सब्जी खाकर सो जाते हैं. व्रत रखने वाली महिला या पुरुष जमीन पर सोते हैं.
– अगले दिन खरना मनाया जाएगा.

 

दूसरा दिन खरना

– कार्तिक शुक्ल पक्ष की पंचमी यानी छठ के दूसरे दिन व्रतधारी दिनभर का उपवास रखते हैं.
– दिन भर के उपवास के बाद व्रती शाम को भोजन करते हैं.
– खरना का प्रसाद बेहद खास माना जाता है.
– प्रसाद में गन्ने के रस में पकी चावल की खीर और घी चुपड़ी रोटी होती है.

 

इन बातों का रखें ख्याल
– नहाय खाय के दिन व्रती को हमेशा साफ सुथरे और धुले कपड़े ही पहनना चाहिए.
– नहाय खाय से छठ समाप्त होने तक व्रती महिला और पुरुष को बिस्तर पर नहीं सोना चाहिए.
– घर में भूलकर भी मांस मदिरा का सेवन न हो.
– साफ सफाई पर विशेष ध्यान दें. पूजा की किसी भी वस्तु को जूठे या गंदे हाथों से ना छूएं.

 

छठ पूजा के लिए सामान
– प्रसाद रखने के लिए बांस की दो तीन बड़ी टोकरी.
– बांस या पीतल के बने 3 सूप, लोटा, थाली, दूध और जल के लिए ग्लास.
– नए वस्त्र साड़ी-कुर्ता पजामा.
– चावल, लाल सिंदूर, धूप और बड़ा दीपक.
– पानी वाला नारियल, गन्ना जिसमें पत्ता लगा हो
– सुथनी और शकरकंदी
– हल्दी और अदरक का पौधा हरा हो तो अच्छा.
– नाशपाती और बड़ा वाला मीठा नींबू, जिसे टाब भी कहते हैं.
– शहद की डिब्बी, पान और साबुत सुपारी
– कैराव, कपूर, कुमकुम, चन्दन, मिठाई

 

ऐसा होगा प्रसाद
ठेकुआ, मालपुआ, खीर-पूड़ी, खजूर, सूजी का हलवा, चावल का बना लड्डू, जिसे लडुआ भी कहते हैं आदि प्रसाद के रूप में चढ़ाया जाएगा.

 

छठ व्रत कथा
कथा के अनुसार प्रियव्रत नाम के एक राजा थे. उनकी पत्नी का नाम मालिनी था. दोनों की कोई संतान नहीं थी. इस बात से राजा और उसकी पत्नी बहुत दुखी रहते थे. उन्होंने एक दिन संतान प्राप्ति की इच्छा से महर्षि कश्यप द्वारा पुत्रेष्टि यज्ञ करवाया. इस यज्ञ के फलस्वरूप रानी गर्भवती हो गईं.

 

नौ महीने बाद संतान सुख को प्राप्त करने का समय आया तो रानी को मरा हुआ पुत्र प्राप्त हुआ. इस बात का पता चलने पर राजा को बहुत दुख हुआ. संतान शोक में वह आत्म हत्या का मन बना लिया. लेकिन जैसे ही राजा ने आत्महत्या करने की कोशिश की उनके सामने एक सुंदर देवी प्रकट हुईं.

 

देवी ने राजा को कहा कि मैं षष्टी देवी हूं. मैं लोगों को पुत्र का सौभाग्य प्रदान करती हूं. इसके अलावा जो सच्चे भाव से मेरी पूजा करता है, मैं उसके सभी प्रकार के मनोरथ को पूर्ण कर देती हूं. यदि तुम मेरी पूजा करोगे तो मैं तुम्हें पुत्र रत्न प्रदान करूंगी. देवी की बातों से प्रभावित होकर राजा ने उनकी आज्ञा का पालन किया.

 

राजा और उनकी पत्नी ने कार्तिक शुक्ल की षष्टी तिथि के दिन देवी षष्टी की पूरे विधि -विधान से पूजा की. इस पूजा के फलस्वरूप उन्हें एक सुंदर पुत्र की प्राप्ति हुई. तभी से छठ का पावन पर्व मनाया जाने लगा. छठ व्रत के संदर्भ में एक अन्य कथा के अनुसार जब पांडव अपना सारा राजपाट जुए में हार गए, तब द्रौपदी ने छठ व्रत रखा.

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